जितनी देर वह दूर रहती है, मेरा दिल दुखता है
वो अपने साथ ही लाती है दिलकश चंद घड़ियां !!
एक बार जो फेरी थीं उसने मेरी तरफ अंखियां
पलभर में लगी आग, बुझाने में लगी सदियां
हर शाम को हमें छोड़के वो घर जाती है लेकिनमुहब्बत ने हमको चुप रहने की सजा दी है
सुनते रहे बस उसकी, वो कहती रही बतियां !!
कभी पूछा नहीं हमसे कि कैसे कटती हैं रतियां !!
दोस्तो के लिए ये दोस्ती की सौगात होगी,
नये लोग होंगे नयी बात होगी,
हम हर हाल मे मुस्कुराते रहेंगे,
अगर तुम्हारी दोस्ती हुमारे साथ होगी.
No comments:
Post a Comment