Monday, 29 August 2016

SHaYaRi hi SHaYaRi


वक़्त रहते संभाल लो मुझे

कहीं तुम मुझे खो दो और तुम्हे खबर भी न हो !
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मेरे पीठ पे जो जख्म हे वो दोस्तो कि निशानी हे…,
वरना सिना तो आज भि दुश्मनो के इंतज़ार  मे बेठा हे….!
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अपने शब्दों में ताकत डालें आवाज में नहीं
बारिश से फूल उगते हैं, तूफ़ान से नहीं….
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पलकों में आँसु और दिल में दर्द सोया है,
हँसने वालो को क्या पता, रोने वाला किस कदर रोया है,
ये तो बस वही जान सकता है मेरी तनहाई का आलम,
जिसने जिन्दगी में किसी को पाने से पहले खोया है..!!
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“वो रोए तो बहुत, पर मुझसे मूह मोड़ कर रोए,
कोई मजबूरी होगी तो दिल तोड़ कर रोए,
मेरे सामने कर दिए मेरे तस्वीर के टुकड़े,
पता चला मेरे पीछे वो उन्हे जोड़ कर रोए.”
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कुछ इस तरहा से सौदा कीया मुझसे मेरे वक़्त ने,
तजुर्बे देकर वो मुझसे मेरी नादानीया ले गया।
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जिन्दगी आज कल गुजर रही है इम्तिहानो के दौर से…..
एक जख्म भरता नही दूसरा आने की जिद करता है…
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“आसमान से तोड़ कर ‘तारा’ दिया है|
आलम ए तन्हाई में एक शरारा दिया है|
मेरी ‘किस्मत’ भी ‘नाज़’ करती है मुझे पे
खुदा ने ‘ग्रुप’ ही इतना प्यारा दिया है…”
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खुदा की मोहब्बत को फना कौन करेगा?
सभी बन्दे नेक तो गुनाह कौन करेगा?
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सफ़र जो धूप का किया तो तजुर्बा हुआ।
वो जिंदगी ही क्या जो छाँव छाँव चली।।….
हद-ए-शहर से निकली तो गाँव गाँव चली।
कुछ यादें मेरे संग पांव पांव चली।
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अच्छे होते हैं बुरे लोग ।
कम से कम अच्छे होने का,
वे दिखावा तो नहीं करते ।
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सबर कर बन्दे मुसीबत के दिन भी गुज़र जायेंगे…
हसी उड़ाने वालो के भी चेहरे उतर जायेंगे…
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इतना, आसान हूँ कि हर किसी को समझ आ जाता हूँ ,
शायद तुमने ही .. पन्ने छोड़ छोड़ कर पढ़ा है मुझे …!!
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अपनी ज़िन्दगी का एक अलग उसूल है,
दोस्त की खातिर मुझे कांटे भी कुबूल है,
हस के चल दूँ मैं कांच के टुकडो पर,
अगर दोस्त कह दे की ये तो मेरे बिछाए हुए फूल हैं.
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ना शाख़ों ने जगह दी ना हवाओ ने बक़शा,
वो पत्ता आवारा ना बनता तो क्या करता…..!!
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“जो भी हूं तेरा ही हूं !! 
मुझसे ऐ मेरी जान मेरी जात न पूछ”..
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वाह रे ईश्क…!
कया कहना तेरा…!!
जो तुजे जान ले…!!!
तु उसी की जान ले…! 
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” तुझे जींदगी भर याद रखने की कसम तो नहीं ली,
पर एक पल के लिए तुझे भुलाना भी मुश्किल है…..!! “
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जरा बताओ तो.. किसे गुरुर है अपनी दौलत पर…
चलो उसे बादशाहों से भरा कब्रस्तान दिखाता हु..”
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ऐ ज़िन्दगी तू अपनी रफ़्तार पे ना इतरा,
जो रोक ली मैंने अपनी साँसें तो तू भी चल
ना पायेगी…
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मुश्कीलो मै भाग जाना आसान होता है…
हर पहेलू जिंदगी का ईम्तेहान होता हैं…
डरने वालो को कुछ मिलता नहि जिंदगी मैं…
और लडने वालो के कदमो मै जहॉं होता है…
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बहूत ही अजीब खेल है यह “मोहब्बत”
जो हारा वो फिर से ना खेला… 
और जो जीता उसने भी तौबा करली…
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तमन्ना हो अगर मिलने की ,,
तो हाथ रखो दिल पर …
हम धड़कनों में मिल जायेंगे ..
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रख हौसला वो मन्ज़र भी आएगा,
प्यासे के पास चल के समंदर भी आयेगा, 
थक कर ना बैठ ऐ मंज़िल के मुसाफिर,
मंज़िल भी मिलेगी और मिलने का मजा भी आयेगा !!
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वक़्त से लड़कर जो अपना नसीब बदल दे, इंसान वही जो अपनी तकदीर बदल दे, 
कल क्या होगा कभी ना सोचो,
क्या पता कल वक़्त खुद अपनी लकीर बदल दे….. !
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जिसके पास थोडा है वह गरीब नही है, लेकिन जो अधिक पाने की इच्छा रखता है वह गरीब है |
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वो मोहब्बत के सौदे भी अजीब करता है;
बस मुस्कुराता है और दिल खरीद लेता है
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ख़बरदार दुबारा मुहब्बत न करना
जरुरी नहीं हर बार खुदकुशी की कोशिश
करके जिन्दा बच जाओगे
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साँचे में किसी और की मुहब्बत के हमने , खुद को कभी ढलने नहीं दिया ,
आँखों को आज भी तेरा इन्तजार है कि गुलाल किसी को मलने नहीं दिया
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सोचते है, अब हम भी सीख ले यारों बेरुखी करना,,,,,,
सबको मोहब्बत देते-देते, हमने अपनी कदर खो दी है,,,,,,!
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किताबों की तरह हैं हम भी….
अल्फ़ाज़ से भरपूर, मगर ख़ामोश….!!
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बारूद मेरे अन्दर का भीग गया तेरे आंसुओं से वरना ये दिल एक बड़ी घटना को अंजाम दे देता…!!!! 
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कभी जिंदगी में किसी के लिये मत रोना, क्योंकि वो तुम्हारे आँसुओं के क़ाबिल ना होगा और जो इन आँसुओं के क़ाबिल होगा, वह तुम्हें रोने ही नहीं देगा ।
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छोड दी हमने हमेशा के लिए उसकी आरजू करना…
जिसे मोहब्बत की कद्र ना हो उसे दुआओ मे क्या मांगना…
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इंतज़ार की आरज़ू अब खो गयी है,
खामोशियो की आदत हो गयी है,
न सीकवा रहा न शिकायत किसी से,
अगर है तो एक मोहब्बत,
जो इन तन्हाइयों से हो गई है..!
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मुझे नींद की इजाज़त भी उसकी यादों से लेनी पड़ती है;
जो खुद तो सो जाती है, मुझे करवटों में छोड़ कर!
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